जिंदगी Meaning of Life


जिंदगी में कुछ भी सुनिश्चित नहीं होता. उसे अपनी यात्रा स्वयं करनी होती है. जिंदगी के लिए अपने कुछ नियम होते हैं. जीवन जीने के लिए कुछ सिद्धांत तय करना पड़ता है. उसके बाद, उन नियमों का पालन करना पड़ता है. जीवनभर तय सिद्धांतों का अनुसरण करना होता है. तभी अपने मंजिल की ओर कदम-दर-कदम आगे बढ़ा जा सकता है. ठीक वैसे ही, जैसे रेल के आवागमन के लिए एक मार्ग सुनिश्चित करना होता है. फिर उस तय मार्ग के लिए लोहे की पटरी बिछानी पड़ती है. लोहे की पटरी बिछ जाने के बाद, उसी तय पटरी पर रेल को दौड़ते रहना पड़ता है. हालांकि जिंदगी रेल की तरह नहीं होती. रेल एक स्थान से दूसरे स्थान को जाती है तो वो दूसरे स्थान से लौटकर पहले स्थान पर आती भी है लेकिन जिंदगी में ऐसा नहीं होता. जिंदगी मुड़कर लौटने का मौका नहीं देती. 

जिंदगी नदी की जलधारा की तरह है. नदी का पानी जब उद्गम स्थल से जब निकल रहा होता है, तब उसे पता नहीं होता है कि उसके लिए रास्ता क्या है? रास्ते में किस तरह के रोड़े, पत्थर, ऊंचाई, ढलान और न जाने क्या-क्या मिलेंगे. पानी को अपना रास्ता स्वयं तय करना होता है. उसी रास्ते पर निरंतर आगे बढ़ते रहना होता है. रास्ते में पत्थर मिले या पेड़, उसको तोड़ते, गिराते या फिर धारा में थोड़ा बदलाव करते नदी आगे बढ़ती है. छोटी नदी बड़ी नदी में मिलती है और बड़ी नदी समंदर में जाकर मिलती है. उद्गम से मुहाने तक का सफर, यही नदी की परिणति है. 


जिंदगी भी नदी की तरह है. जन्म के समय, किसी को नहीं पता होता है, बढ़ती उम्र के साथ जीवन किस तरह करवट बदलेगा, गाड़ी कैसे आगे बढ़ेगी लेकिन बाधाएं आती है, चुनौतियां आती है. जिंदगी या तो बाधाएं और चुनौतियों का सामना करते हुए अपने बनाए नियमों का पालन करते हुए आगे बढ़ती है या फिर रास्ता बदलते हुए आगे बढ़ती है. नदी की तरह चलते रहने का नाम है जिंदगी.  नदी का जीवन, उद्गम से लेकर मुहाने तक की यात्रा है. ठीक वैसे ही गर्भ से लेकर समाधि तक, जन्म से लेकर मरण तक की यात्रा है जिंदगी. 

- दीपक राजा 

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