- दीपक राजा
आलोच्य पुस्तक की कहानी को पढ़ने पर अहसास होता है कि घटनाएं हमारे आजू-बाजू ही नहीं, कई बार तो पाठक अपने जीवन की घटनाओं से जुड़ता हुआ अनुभव कर सकता है. समाज में पनप रहे नई सोच को लेखक ने इस तरह से कलमबद्ध किया है कि जीवन डगर पर लड़खड़ाते कदम को भी संघर्षशील बनाने को प्रेरित करता है चाहे वह कहानी कर्तव्य बोध हो या नदी किनारे या फिर रुपए दस हजार.
नाते-रिश्तेदारों के संबंधों में संवेदनशील रहना और एक-दूसरे की भावनाओं का कद्रदान बने रहना कितना जरूरी है, वो कहानी "अभाव के बीच रिश्तों का दर्द" को पढ़ने के दौरान समझ में आता है. हालांकि, कहानी का पात्र विनोद की कर्तव्य परायणता वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, आने वाली पीढ़ी के लिए यक्ष प्रश्न के रूप में है.
हाल के वर्षों में पूरे विश्व को परेशान करने वाली महामारी कोविड 19 के दौर में पारिवारिक झंझावतों में महिलाओं की भूमिका को "कर्तव्य बोध" में शब्दांकित किया गया है. महिलाएं कैसे सामाजिक मर्यादा और अपने कर्तव्य के बीच सामंजस्य बनाने के लिए संघर्षरत रहती हैं और उसमें सफल होती हैं. उसे शब्दों में चलचित्र की तरह पिरोया है.
जुआ का खेल, कौरव पांडव कुल को कुरुक्षेत्र के रण में लाकर खड़ा कर देता है. इसी ओर इंगित करता है कहानी "ताश के खिलाड़ी". पूर्वोत्तर भारत का राज्य है नागालैंड, जिसको लेकर अलग-अलग तरह की भ्रांति बनी हुई है. वहां की पृष्ठभूमि की आदिवासी लड़की की कहानी है "जख्मों के निशान". जंगल-पहाड़ का संघर्षरत जीवन और किशोरवय के प्रेमाकर्षण, इस कहानी में आंचलिकता का बोध कराता है.
गरीब परिवार, अमीर परिवार और मध्यवर्ग परिवार के बीच संबंध कैसा है, उसे देखने के लिए पास, बहुत पास आकर देखने पर समझ में आता है कि सारा खेल पैसे का है. एक कहावत है बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपया. इसका अहसास "रुपए दस हजार" कहानी में भी होता है. हालांकि कहानी सुखद मोड़ पर है कि गरीबी किसी लालच या पद-प्रतिष्ठा की मोहताज नहीं, उसके लिए ईमान ही उसका धर्म है.
कथा कहने सुनने की परंपरा पर भारत की पूरी सामाजिक व्यवस्था निर्भर है. कथा को ही आध्यात्म से इतर सरल शब्दों में कहानी कहते हैं. और समकालीन घटनाओं को शाश्वत तरीके से कथानक के रूप में रचनाधर्मी जब कुछ शब्दों के जरिए चित्रांकन करते हैं, वो समकालीन कहानी के रूप में परिलक्षित होता है. कहानी पाठकों को अंत तक बांधे रखे और कथानक लालित्य के साथ सदैव जीवंत रहे, यही कलमकार की सफलता है. आलोच्य पुस्तक 'चयनित कहानियां' में 13 कहानी है. इसमें से ज्यादातर कहानी इस मुकाम को प्राप्त करता हुआ प्रतीत होता है.
पुस्तक का नाम - चयनित कहानियां
कहानीकार - चितरंजन भारती
प्रकाशक - न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली
मूल्य - 225 रुपए

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