कोविड काल का 'कर्तव्य बोध'

- आरती

कठिन से कठिन समय में भी ईश्वर आगे बढ़ने के लिए कोई न कोई रास्ता अवश्य छोड़ते हैं. कोरोना और कोविड महामारी के दिनों में, सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में, लोगों के कर्तव्य बोध ने घर-परिवार से लेकर देश और दुनिया को घोर निराशावादी माहौल से बाहर निकाला. अपनों को बचाने की जद्दोजेहद के बीच, कोविड महामारी के तीन साल (2020-2022) कैसे बीता? समाज के तमाम लोगों को भी बचाने की कवायद ही, कर्तव्य बोध है. कोविड दौर की वो घटनाएं जो आंखों के सामने से गुजरी है. उसे याद करके कई बार दिल और दिमाग शून्य हो जाता है. कहानीकार चितरंजन भारती की कहानी संग्रह कर्तव्य बोध उन्हीं अनुभवों की याद दिलाता है. 

रिश्तों में थोड़ी खटपट होती है लेकिन जहां प्यार और समर्पण को देखना हो तो वहां छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज करने की आदत डालनी चाहिए. शायद इसीलिए लेखक ने 'प्यार झुकता नहीं' कहानी के मुख्य पात्र से कहलवा दिया कि अपनों के खातिर, अपने परिवार के खातिर यह प्यार ही है, जो झुकना सिखाता है. हालांकि इस कहानी संग्रह की एक कहानी 'वास्तु दोष कहां है', चांद में एक दाग की तरह यहां अनफिट है. लेखक इस कहानी को यहां क्यों इतना महत्वपूर्ण मानते हुए इसे पहली कहानी बनाया? ये तो लेखक जानें! एक बात तय है कि वास्तु शास्त्र हमेशा हमारे और आपके जीवन प्रभावों की ओर इशारा करता है, आप उसे किस तरह और किस भाव से अमल में लाते हैं, उसका प्रभाव उसी भाव का होता है. गैराज की रूप रेखा बदलने के लिए मानसिक रूप से कोई तैयार नहीं थे, मन मारकर और नकारात्मक मन से किए काम का सकारात्मक प्रभाव ही हो, यह जरूरी तो नहीं!  

कोविड काल में, एक ओर जहां अस्पताल में बेड, दवाई और ऑक्सीजन के लिए मारा-मारी, वहीं, दूसरी ओर डॉक्टर से लेकर मेडिकल स्टॉप की ओवर ड्यूटी, महामारी के दौरान निकले अंग्रेजी के शब्द लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग,  होम आइसोलेशन ने प्रशासन के जुड़े कर्मचारियों-अफसरों को ही नहीं सामाजिक दायित्वों समझने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जो अपने कर्तव्य बोध का पालन किया है. उसका अहसास, साहस और कार्य के प्रति कर्तव्य परायणता को देखने का एक अवसर प्रदान करता है ये कोरोना काल की कहानियां, जो चितरंजन भारती की कलम से निकली है. कोरोना काल ने हर किसी को अहसास करा दिया कि परिवार से लेकर रिश्तेदार तक, दोस्त से लेकर दस्तकार कौन कितना सगा है, और कौन किसके लिए कितना महत्वपूर्ण है? 


पुस्तक का नाम - कर्तव्य बोध (कहानी संग्रह)

लेखक -  चितरंजन भारती

प्रकाशक - सृजनलोक प्रकाशन, नई दिल्ली 

मूल्य - दो सौ रुपए 


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