गृह मंत्री के हिन्दी पर बयान से देश में मचा घमासान


संसदीय राजभाषा समिति के अध्यक्ष के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक बयान आया. उन्होंने कहा है कि पूरे देश में अंग्रेजी के विकल्प के तौर पर हिन्दी भाषा का उपयोग करने का समय आ गया है. इस बयान के आते ही देश में भाषा को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. गृह मंत्री के बयान को ठीक से समझे बिना ही बंगाल से लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में हिन्दी भाषा के विरोध की राजनीति शुरू हो गई. गृहमंत्री अमित शाह के सलाह को कांग्रेस ने कल्चर टेररिज्म (सांस्कृतिक आतंकवाद) कहा है तो तृणमूल ने इसे बीजेपी का एक देश, एक भाषा औऱ एक धर्म का एजेंडा लागू करने का हथकंडा करार दिया है. 





संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक  

बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में 7 अप्रैल को संसद परिसर में संसदीय राजभाषा समिति की 37वीं बैठक थी. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कर रहे थे. उन्होंने संसदीय राजभाषा समिति के सदस्यों से कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल का 70 प्रतिशत मसौदा अब हिन्दी में ही तैयार किया जाता है. अब समय आ गया है कि राजभाषा हिन्दी को देश की एकता का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए. हिंदी को स्थानीय भाषाओं के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए. बैठक में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा और निशीथ प्रमाणिक, राजभाषा संसदीय समिति के उपाध्यक्ष भर्तृहरि महताब और समिति के अन्य सदस्य भी मौजूद थे. 

अंग्रेजी के विकल्प के रूप में है हिन्दी : अमित शाह 

हिन्दी विरोध में विपक्ष के तमाम नेताओं के बयान को गौर से सुनिए तो लगता है कि वे अमित शाह के बयान को समझे बगैर ही बोलना शुरू कर दिया. अमित शाह ने कभी नहीं कहा कि हिन्दी राष्ट्रभाषा है. उन्होंने ये भी नहीं कहा कि हिन्दी में ही काम करना होगा. उन्होंने ये कभी नहीं कहा कि स्थानीय भाषाओं में सरकारी काम नहीं करना चाहिए. उन्होंने तो सलाह के तौर पर साफ-साफ कहा कि हिंदी को स्थानीय भाषाओं के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि अंग्रेजी के विकल्प के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए. 

अब आप स्वयं विरोधी खेमे के नेताओं का बयान देखिए और समझिए कि क्या विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री के बयान को ठीक से समझा है...

सांस्कृतिक आतंकवाद लागू करना चाहती है बीजेपी : सिद्धारमैया


केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आधिकारिक भाषा के संदर्भ में बयान पर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने कहा कि बीजेपी गैर हिंदी भाषी राज्यों में अपना सांस्कृतिक आतंकवाद का एजेंडा लागू करने की कोशिश कर रही है. अमित शाह पार्टी के राजनीतिक एजेंडे के लिए अपने गृहराज्य गुजरात और मातृभाषा गुजराती को धोखा दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा नहीं है और न ही ऐसा कभी होने देंगे. 

एजेंडा थोपना चाहती है बीजेपी : एचडी कुमारस्वामी


कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल (एस) के नेता एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र सरकार अपना एजेंडा थोपना चाहती है लेकिन वे लोग कभी सफल नहीं होंगे. जनता सबक सिखाएगी. वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि मैं हिन्दी के साथ काफी सहज हूं लेकिन मैं ये भी नहीं चाहता कि किसी को जबर्दस्ती बोलने के लिए मजबूर किया जाए.

भड़काने और विभाजनकारी राजनीति का समर्थन नहीं : सिंघवी 

वरिष्ठ नेता और कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि गृहमंत्री हमें हिन्दी को लेकर उपदेश देने की कोशिश कर रहे हैं. मैं हिन्दी का बहुत बड़ा समर्थक हूं लेकिन मैं थोपने, भड़काने और विभाजनकारी राजनीति का समर्थक नहीं हूं.

एक देश, एक भाषा और एक धर्म का एजेंडा कभी पूरा नहीं होगा : टीएमसी 

तृणमूल कांग्रेस नेता सौगत राय ने कहा कि अगर अमित शाह गैर हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी थोपने की कोशिश करेंगे तो उसका विरोध होगा. इतनी विविधता वाले इस देश में इसे कभी स्वीकार नहीं किया जाएगा. बीजेपी का एक देश, एक भाषा और एक धर्म का एजेंडा कभी पूरा नहीं होगा.

एक पहचान कभी एकता पैदा नहीं करेगी : स्टालिन 


तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि क्या अमित शाह मानते हैं कि अकेले हिन्दी भाषी राज्य पर्याप्त है और उन्हें और राज्यों की जरूरत नहीं है? एक भाषा का इस्तेमाल एकता के लिए ठीक नहीं है. एक पहचान कभी भी एकता पैदा नहीं करेगी. चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा कि आप बार-बार वही गलती कर रहे हैं लेकिन आप नहीं जीतेंगे.

राजभाषा एक्ट के विरुद्ध है शाह का बयान : अलगिरी  

तमिलनाडु के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केएस अलगिरी ने कहा कि अमित शाह का बयान संविधान और राजभाषा एक्ट के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि राजभाषा एक्ट 1967 में स्पष्ट कहा गया है कि गैर हिन्दी राज्यों में संचार की भाषा अंग्रेजी होगी और इस एक्ट में ये सुनिश्चित किया गया कि किसी भी राज्य पर हिन्दी थोपा नहीं जाएगा. 

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